23 जुलाई 2017

तैयार हो जाओ (गीतिका)


छंद- विधाता
मापनी- 1222 1222 1222 1222
पदांत- के वास्‍ते तैयार हो जाओ
समांत- अन  

चलो सबके, अमन के वासते, तैयार हो जाओ.
चलो अपने, वतन के वासते, तैयार हो जाओ.
भितरघाती, भरे हैं देश में, सरहद पे दुश्‍मन है,
चलो उनके, दमन के वासते, तैयार हो जाओ.

बताना मीडिया का, सैन्यबल, भारी न पड़ जाये
कहीं संसार में छवि, देश की, नहीं बिगड़ जाये    
चलो इसके, शमन के वासते, तैयार हो जाओ
चलो अपने, वतन के वासते, .....................’’

दरिंदों,  घूसखोरों, से है’ अपना देश शर्मिन्‍दा,
कर रहे भ्रष्‍ट, अफसर हैं ,दिनों दिन देश को गंदा,
चलो इनके, दलन के वासते, तैयार हो जाओ.
चलो अपने वतन के वासते, .....................’’

हवा भी आज दूषित है, धरा को भी बचाना है,
सघन वन से सजाना है, फजाओं को हँसाना है.
चलो उजड़े, चमन के वासते, तैयार हो जाओ.
चलो अपने, वतन के वासते, .....................’’

हमें भी दुश्‍मनों को, मिल के अब, देनी चुनौती है
न जादू टोटके करना, न अब रखना मनौती है
चलो अब ,संगठन के वासते, तैयार हो जाओ.
चलो अपने, वतन के वासते, .....................’’

चली कैसी हवा, अपने बने, वहशी घर आँगन हैं
भरे हैं देश में, दस नंबरी, ढेरों दशानन है,
चलो इनके, दहन के वासते, तैयार हो जाओ.  
चलो अपने, वतन के वासते, .....................’’