14 फ़रवरी 2022

लय जीवन को मिलती है

 


गीतिका

छंद- कीर्ति (वार्णिक)

मापनी- 112 112 112 2

पदांत- है 

समांत- अती

सरदी कम ही लगती है ।

जब धूप नहीं चुभती है ।

तन को कम वस्‍त्र सुहाते,

जब प्‍यास घनी लगती है ।

गुलजार सभी महकाती,   

जब मंद हवा चलती है ।

मधुमास लगा धरती भी,

जब खूब सजा करती है ।

मधुकोश भरे छलकाती,

कलिका भँवरे तकती है ।

तितली रँगने पर आती,

बगिया बगिया फिरती है ।  

चहुँ ओर मिले हरियाली,

लय जीवन को मिलती है ।

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