12 मार्च 2017

होली पर मुक्‍तक



 1
रंग
इंद्रधनुष सा जीवन का हो रहन-सहन और ढंग.
बैरभाव कटुता की न कोई भरी हुई हो भंग
मन उमंग से भरे रँगे हो धरती और आकाश,
रंगों में दिखलाई दे अपनी संस्कृति का रंग.
2
बदरंग
रंगों में हो रँगे हुए, चहुँ ओर दिखे उल्लास.
उड़े हुए हों रँग न कहीं न चेहरे दिखें उदास.
राग विवाद नहीं हो होली हो न कहीं बदरंग,
घर, आँगन औरगली-गली हर जगह दिखे मधुमास.
3
होली है
होली में रंगत रंगों की पहचानो तो होली है.
होली में अंगत रिश्‍तों को पहचानो तो होली है.
मन का मैल छुड़ाने तन को रँगने का है पर्व’ ‘आकुल’, 
इसीलिए तो कहते हैं जी बुरा न मानो होली है.
4
आ गई है होली
रिश्‍तों को फिर लुभाने आ गई है होली.
अपनों को फिर मिलाने आ गई है होली.
चार दिन की जिंदगी है मिला करो यारो,
महफिल को फिर सजाने आ गई है होली.

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