1 फ़रवरी 2017

बसंत

गीतिका 

जाने को है शरद,  माघ का सावन हुआ बसंती.
रुत बसंत की भोर, आज मनभावन हुआ बसंती.   

बौर खिले पेड़ों पर, लहराई गेहूँ की बाली,     
मनुहारों, पींगों की रुत मनमादन हुआ बसंती.

आहट होने लगी फाग की, पवन चली मधुमासी,
चढ़ने लगा रंग तन-मन पर दामन हुआ बसंती.

डाल डाल पर फूल खिले, ली अँगड़ाई कलियों ने,
नंदन कानन, अभ्‍यारण्‍य‘, वृन्‍दावन हुआ बसंती.

‘आकुल’ आया बसंत दूत ले कर संदेशा घर-घर,
 करने अंत विद्वैष-वैर,  घर आँगन हुआ बसंती.

-0- 

माघ का सावन - मावठ, मनमादन- कामदेव रूपी मन
बसन्‍त दूत- कोयल 

26 जनवरी 2017

आओ मनायें स्‍वतंत्रता-अपनत्‍व का गणतंत्र

26 जनवरी 2017 का आयोजन  



आओ मनाएँँ स्‍वतंत्रता-अपनत्‍व का गणतंत्र

गीतिका  
*********
पदांत- का गणतंत्र 
समांत- अत्‍व

आओ मनाएँ स्वतंत्रता-अपनत्व का गणतंत्र. 
आओ-मनाएँ, सहभागिता-समत्व का गणतंत्र.

दिखलाई दे उत्सव, पर्व, त्यो‍हार पर बंधुत्‍व, 
आओ मनाएँ कृतज्ञता-सिद्धत्व का गणतंत्र.

न हो कोई प्रमाद, जातिगत भेदभाव या द्रोह, 
आओ मनाएँ सम्बद्धता-महत्व का गणतंत्र.

भ्रष्टाचारी, आतंकी, दुष्कर्मी, का हो नाश,
आओ मनाएँ वत्सलता-बुद्धत्‍व का गणतंत्र.

अतिथिदेवोभव धर्म, कर्म हो नीर-क्षीर विवेक, 
आओ मनाएँ सदा अमरता-तत्व का गणतंत्र.

25 जनवरी 2017

है प्रभुत्‍व नारी का

गीतिका 

क्‍या दंगल क्‍या खेल, सभी में है प्रभुत्‍व नारी का.
क्‍या धरती क्‍या आसमान में है प्रभुत्‍व नारी का.

सत्‍ता की ऊँचाई हो या, भद्र प्रशासन का पद,
रंगमंच, तीनों सेना में है प्रभुत्‍व नारी का.

पर्वों त्‍योहारों में सर्वोपरि सम्‍मान निहित है,
घर की हर परम्‍पराओं में है प्रभुत्‍व नारी का.

संस्‍कार की नींव डालती बच्‍चों में घर-घर में,
संरक्षण की बागडोर में है प्रभुत्‍व नारी का.

ममता की मूरत है, सेवा भाव अटूट भरा है,
माँ, बेटी क्‍या बहू, बहिन में है प्रभुत्‍व नारी का.

मंगल सूत्र पहन मंगल की करे कामना सब की,
अस्मिता से विचलित स्मिता में है प्रभुत्‍व नारी का.   

निष्‍काम कर्म की प्रतिमूरत, देवी है, श्रद्धा है,
जीवन के हर संस्‍करण में है प्रभुत्‍व नारी का.

24 जनवरी 2017

जो जीत के न पा सके

गीतिकाा

छंद- नराचिका  
वाचिक मापनी पर आधारित
2212 1212


जो जीत के न पा सके
वो रीति से न पा सके

जो पालता है दंभ को
वो नीति से न पा सके

हैं वीर वो स्‍वदेश की
सेवा में’ काम आ सके

वो राज है जहान में
जो प्रीति से बना सके

बी‍ती वही बिसारते
जो वर्द्धमान ला सके

23 जनवरी 2017

देख सको तो देखो

(गीतिका)
छंद- ‘सार’ 
मात्रिक भार - 16-12
पदांत- देख सको तो देखो
समांत- अत
रुके हुए पानी की हालत, देख सको तो देखो.
बेघर बेचारों की आफत, देख सको तो देखो.
जिनके सिर पर हाथ नहीं है, उन अनाथ की आँखें,
भूख-प्यास की बेदम राहत, देख सको तो देखो.
नारी की अस्मिता बचेगी, कैसे जब दुर्जन में,
तन की भूख बनेगी हाजत, देख सको तो देखो.
नारी कैसे चंडी-दुर्गा, बन कर संहारेगी,
घर बच्चे होंगे तब आहत, देख सको तो देखो.
इक दिन अबला छोड़ मोह घर-बार बाल-बच्चों का,
’आकुल’ बने बला की ताकत, देख सको तो देखो.

16 जनवरी 2017

दो मुक्‍तक

1. मकर संक्रांति
देश काल अब नूतन करवट बदल रहा है.
सूर्य संक्रमण कर अपना पथ बदल रहा है.
आज एक मृत्‍युंजय का निर्वाण दिवस है,
भीष्‍म प्रतिज्ञा करें जीवन पथ बदल रहा है.



2. दान-पुण्‍य 
दान-पुण्‍य हो, दान-धर्म हो या हो जीवन धर्म.
रक्षा इसका कवच दयानिधि है जीवन का मर्म.
हर युग में है दान-पुण्‍य से बना मनुष्‍य महान्,
क्‍या दधीचि क्‍या कर्ण सभी का दान-पुण्‍य सत्‍कर्म.



10 जनवरी 2017

तीन मुक्‍तक

विश्‍व हिन्‍दी दिवस की शुभकामनाएँँ 

1
आजादी से पहले बिरतानिया में सूरज नहीं कभी अस्‍त होता था.
अत्‍याचार तब देश में भारतीयों पर दिनोंदिन जबरदस्‍त होता था.
काश हिंदी राष्‍ट्रभाषा तय हो जाती हर भारतीय तब देश के लिए,
हिन्‍दी हैं हम वतन है हिन्‍दोस्‍ताँँ हमारा, गाता और मस्‍त होता था.
2

आदमी आलस्‍य त्‍याग नई ऊर्जा भरते हैं जब सूर्य उदय होता है .
पंछी भी नई ऊर्जा ले परवाज भरते हैं जब सूर्य उदय होता है.
प्रकृति भी अपनी अनुपम छटाएँँ बिखेरती है ऊर्जा ले कर सूर्य से,
जीवन सारे इसी ऊर्जा से उम्र तय करते हैं, जब सूर्य उदय होता है.
3
भूल-चूक लेनी-देनी, व्‍यवहार चला ऐसे जब से.
दुनियादारी निभी और घर-बार पला ऐसे तब से.
इसीलिए जड़ जमी हुई युग युग से भ्रष्‍टाचारी की,
लेन-देन की दौलत से व्‍यापार फला ऐसे तब से.