18 जून 2018

मिला यह तन, पिता माता का ही प्रतिदान होता है (गीतिका)

छंद- विधाता
मापनी- 1222 1222 1222 1222
पदांत- होता है
समांत- आन
(पिता दिवस पर)
मिला यह तन, पिता-माता का’ ही, प्रतिदान होता है.
सभी परिवार में, हर एक की, पहचान होता है.

मिला है  नाम, दुनिया में बदौलत, उनके ही यारो,
पिता माता के’, गुणसूत्रों का’ वह, संज्ञान होता है.

पिता, माता का है सौभाग्‍य, घर का है, वो’ कुलभूषण,
धुरी परिवार, की होता पिता, अधिमान होता है

बिना माता-पिता के घर, नहीं होता, कभी भी घर,
बिना संतान, के भी घर सदा, सुनसान होता है.

प्रतिष्‍ठा मान अरु सम्‍मान, हासिल करना’, जीवन में
पिता-माता के, हर इक त्‍याग का, गुणगान होता है.     

पिता को है, कहा ग्रंथों ने, सौ गुरुओं के, समदर्शी,
इसी कारण, पिता इक रूप में, भगवान होता है.

15 जून 2018

गोकुल सूना हो गया है (गीतिका)


कान्हा जब से' गये, गोकुल, सुनसान, हो गया है.
न जाने, है कौन, जिस पर, मेहरबान, हो गया है.

दिन रात, देखते हैं, पथ, कोई खबर न, आहट,
न जाने, किस घर, नगर में, मेहमान, हो गया है.

यादें हीतो, बची हैं अब, बिखरी, जहाँ-तहाँ पर,
मनमोहना, कहाँ तू, अंतर्धान, हो गया है.

दिन-रात, बीतते, हैं अब, स्मृतियों के’, खण्डहर में
वृंदावन भीअब तभी से, बियाबान, हो गया है.

मौसम के जैसे, वे दिन, आयेंगे, लौट के’, क्या,
भाता न, गीत है अब, अरण्यगान, हो गया है.

13 जून 2018

गर्मी में अब तो गरम होती है हर भोर ( गीतिका)

छंद- दोहा


गर्मी में अब तो गरम, होती है हर भोर.
रातों में लू की तरह, हवा मचाये शोर.

बीतें ले कर करवटें, अकुलाहट में नित्‍य,
रातें जगते ही कटें, जैसे जगते चोर .

सोच सोच कर है दुखी, फिर किसान इस बार,
भीषण गर्मी सी नहीं,  हो वर्षा घनघोर.

मौसम के लगते नहीं, हैं अच्‍छे आसार,
बेमौसम बरसात पर, चलता किसका जोर.

प्रकृति वल्‍लभा की दशा, देख सूर्य का तेज,
नीलगगन भी मौन है, व्‍याकुल धरा कठोर.

पवन झकोरा आएगा, गुजर जाए'गी रात,  
मौसम से टूटे नहीं, बस जीवन की डोर. 
 
चल ‘आकुल’ ऐसा करें, प्रकृति रहे खुशहाल,
कण-कण वसुधा का फले,  महके चारों ओर.  

8 जून 2018

गर्मी का आनंद उठायें इस मौसम में (गीतिका)

छंद- चौपाई + चौपाई की अर्द्धाली, 16, 8 पर यति
पदांत- इस मौसम में
समांत- आएँ (उकारांत)


चलो चलो सब मौज उड़ाएँ इस मौसम में. 
गर्मी का आनंद उठायें इस मौसम में.

हर मौसम के होते सुख-दुख अपने अपने,
एक एक कर खुशी जुटायें इस मौसम में.

गोले, कुल्‍फी, फालूदा, ठंडाई, चुस्‍की,
सौ दौ सौ का नोट तुड़ायें इस मौसम में.

खरबूजा तरबूज फालसे खिरनी लायें,
मंडी जा कर आम तुलायें इस मौसम में.

इस मौसम में आम न खाया तो क्‍या खाया,
सब मित्रों को आम चुसायें इस मौसम में. 

कूलर, एसी, छाया, पंखा, ठंडा पानी,
ना हों छक्‍के खूब छुड़ाएँ, इस मौसम में.

जाते जाते गरमी को भी भेंट करें सब,
मिलजुल कर सब पौद उगायें इस मौसम में.

फल का राजा आम, आम जनों का राजा,
नहीं आदमी आम भुलाएँ इस मौसम में.