
मापनी-१२२ १२२ १२२ १२
समांत-आरा
पदांत-नहीं
पदांत-नहीं
कभी
मन्नतों ने उबारा नहीं.
बिना
काम होता गुजारा नहीं.
किसी
ने पुकारा दुबारा नहीं.
किसी
ने किसी को सुधारा नहीं.
अगर
आदमी ने बुहारा नहीं.
जियो
यूँ न ‘आकुल’ कहे आपसे,
कि
अहसान कोई उतारा नहीं
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