18 मई 2019

कभी मन्‍नतों ने उबारा नहीं (गीतिका)

छंद-शक्ति

मापनी-१२२ १२२ १२२ १२
समांत-आरा
पदांत-नहीं

कभी मन्‍नतों ने उबारा नहीं.
बिना काम होता गुजारा नहीं.

न रहना सहारे किसी और के,
किसी ने पुकारा दुबारा नहीं.

सँवारा स्‍वयम् को स्‍वयम् ने सदा,
किसी ने किसी को सुधारा नहीं.

करेंगी सफा आँधियाँ बस्तियाँ,
अगर आदमी ने बुहारा नहीं.

जियो यूँ न ‘आकुल’ कहे आपसे,
कि अहसान कोई उतारा नहीं 

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